बदलाव

By Koshika Jhavar


बदलाव यानी परिवर्तन, संसार का मूल आधार है। सृष्टि की संरचना से लेकर वर्तमान काल तक परिवर्तन ही अटल सत्य है। प्रारंभ में कुरूप प्रतीत होने वाली इल्ली भी अंत में परिवर्तित हो एक सुंदर मनमोहक तितली का रूप धारित कर लेती है। 

बदलाव प्रकृति का शाश्वत नियम है और इंसान तो बस एक माध्यम। परिवर्तन की निर्झरिणी (नदी) सदा उदधि (समुद्र) में समाहित हो जाती है इसलिए मझधार में हार नहीं मानें अर्थात बदलाव सर्वदा किसी महान उद्देश्य का आधार होता है इसलिए मनुष्य को राह के मध्य में ही विमुख नहीं होना चाहिए। हमें परिवर्तन से डरना नहीं अपितु मार्ग में आने वाले प्रत्येक उतार-चढ़ाव को सहज भाव से स्वीकार कर और स्वाभविक मानकर अनवरत संघर्ष करना चाहिए। समय के साथ निरंतर बदलाव ही प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होने में सहायक है । सदैव स्मरण रखें कि जिस तरह अंधेरी रात्री के पश्चात स्वर्णिम सवेरा होता है उसी प्रकार परिवर्तन ही सफलता की कुंजी है। 

अब प्रश्न यह उठता है कि इस बदलाव का प्रारंभ कहाँ से हो? सरल है, स्व परिवर्तन ही विश्व परिवर्तन है। स्वयं के अवगुण को त्यागें, सद्गुणों को अपनाएं, सकारात्मक सोच रखें, समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, अत्याचार, अनैतिकता व अज्ञानता को समाप्त करने का प्रयत्न करें तथा विश्वास रखें कि यह कुसमय भी बीत जाएगा। हमारी जिंदगी का हर अनुभव हमें नव निर्माण की सीख देता है। समाज का विकास ही हमारा मनोरथ है और विकास ही परिवर्तन है । अन्ततः जिंदगी उन लोगों के लिए आसान नहीं दिलचस्प है, जो परिवर्तन का स्वप्न देखते हैं।

(COVID19 महामारी ने विद्‌यार्थी जीवन तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र को कैसे परिवर्तित किया है? अपने विचार बताएं :) )

Comments

  1. सत्यवचन! परिवर्तन ही सतत है और हमारे जीवन और सृष्टि का मूलाधार। एक गहरे विषय पर बडा सुन्दर निबन्ध। बहुत बढिया लेख कोशिका!

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  2. हां बिकुल सही लिखा है। मै भी इसको मां था हूं। नील डी जडिया

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