स्वतंत्रता दिवस
Drawing by Aaditya Shukla
Article by Koshika Jhavar
15 अगस्त 1947 भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। वर्षों के संघर्ष के पश्चात भारत परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त हो पाया और स्वाधीनता के अनमोल पंखों की प्राप्ति का असाधारण व अद्वितीय अनुभव कर पाया। यह दिन असंख्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अदम्य साहस, बलिदान एवं त्याग को परिलक्षित करता है । साधारणतः हम इस दिन को गुलामी से आज़ादी में परिवर्तित होने के रूप में मनाते हैं परंतु वास्तव में यह दिन स्वतंत्रता का पर्यायवाची व प्रतीक है । यदि हम अंग्रेज़ों के शासन से मुक्त हो जाने को आज़ादी मानते हैं तो यह हमारी ग़लतफहमी होगी। स्वाधीनता को जन्म से मिले उपहार के रूप में स्वीकार कर संतुष्ट हो जाना हमारी भूल होगी। स्वतंत्रता की यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है, अभी- भी हमारे मुल्क को तमाम बंधनों से मुक्त होना है। तो आइए 74वें स्वतंत्रता दिवस पर हम एक ऐसे वतन की स्थापना की अभिलाषा रखें जो अज्ञानता, रूढ़ि तथा जातिवाद, बेरोज़गारी, गरीबी, अपराध, भेदभाव एवं भ्रष्टाचार से उन्मुक्त हो, तभी हमारा देश सच्चे मायनों में स्वतंत्र कहला पाएगा। अपने स्तर पर भी हम स्वतंत्रता दिवस मना सकते हैं। आज के दिन कम-से-कम विदेशी वस्तुओं का उपयोग करें तथा स्वदेशी अपनाए, किसी अक्षम व्यक्ति की सहायता करें और किसी के चेहरे की मुस्कान बनें । अतः देशभक्ति सिर्फ तिरंगा फहराने में नहीं है अपितु देश को मज़बूत व सशक्त बनाने में है।
जय हिन्द!

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